बजरंग बाण | Bajrang Baan: अद्भुत शक्ति का आविष्कार

बजरंग बाण एक बहुत ही प्रसिद्ध हिंदू आराधना मंत्र है जो हनुमानजी के प्रति भजन किया जाता है। इस bajrang baan का पाठ भक्तों के द्वारा ध्यानपूर्वक किया जाता है और उन्हें शक्ति, सुख, और सफलता प्रदान करता है।

इस मंत्र का पाठ करने से भक्तों को निजी और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव मिलता है। Bajrang baan pdf के रूप में भी प्राप्त किया जा सकता है। जिससे भक्तों को आसानी से सभी शब्दों को समझने और ध्यान देने की सुविधा प्रदान करता है।

यह एक प्रसिद्ध हनुमान आराधना मंत्र है जो लोगों द्वारा प्रेम से जाप किया जाता है। इस से मंत्र भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख की प्राप्ति में होती है। यह bajrang baan lyrics in hindi में है, जिससे भक्तों को उच्चारण और विधि का समझने में मदद मिलती है। 

Bajrang Baan Lyrics in Hindi

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥०१॥

जन के काज विलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥०२॥

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा ।
सुरसा बद पैठि विस्तारा ॥०३॥

आगे जाई लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ॥०४॥

जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम पद लीन्हा ॥०५॥

बाग उजारी सिंधु महं बोरा ।
अति आतुर यम कातर तोरा ॥०६॥

अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेट लंक को जारा ॥०७॥

लाह समान लंक जरि गई ।
जय जय धुनि सुर पुर महं भई ॥०८॥

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥०९॥

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।
आतुर होय दुख हरहु निपाता ॥१०॥

जै गिरिधर जै जै सुखसागर ।
सुर समूह समरथ भटनागर ॥११॥

ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।
बैरिहिं मारू बज्र की कीले ॥१२॥

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो ।
महाराज प्रभु दास उबारो ॥१३॥

ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥१४॥

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥१५॥

सत्य होहु हरि शपथ पाय के ।
रामदूत धरु मारु धाय के ॥१६॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा ।
दु:ख पावत जन केहि अपराधा ॥१७॥

पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ॥१८॥

वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥१९॥

पांय परों कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥२०॥

जय अंजनि कुमार बलवन्ता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥२१॥

बदन कराल काल कुल घालक ।
राम सहाय सदा प्रति पालक ॥२२॥

भूत प्रेत पिशाच निशाचर ।
अग्नि बेताल काल मारी मर ॥२३॥

इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की ।
राखु नाथ मरजाद नाम की ॥२४॥

जनकसुता हरि दास कहावौ ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥२५॥

जय जय जय धुनि होत अकाशा ।
सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ॥२६॥

चरण शरण कर जोरि मनावौ ।
यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ॥२७॥

उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई ।
पांय परौं कर जोरि मनाई ॥२८॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता ।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥२९॥

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।
ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥३०॥

अपने जन को तुरत उबारो ।
सुमिरत होय आनन्द हमारो ॥३१॥

यह बजरंग बाण जेहि मारै ।
ताहि कहो फिर कौन उबारै ॥३२॥

पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करैं प्राण की ॥३३॥

यह बजरंग बाण जो जापै ।
तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे ॥३४॥

धूप देय अरु जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥३५॥

॥ दोहा ॥

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ॥

बजरंग बाण पाठ करने की विधि

यह मंत्र हनुमानजी की कृपा, शक्ति और सुरक्षा को प्राप्त करने का माध्यम है। इसका पाठ करने से भक्त को उनकी कृपा और आशीर्वाद मिलते हैं, जो उनके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता को प्रवर्धित करते हैं।

इसके पाठ की बात की जाए तो कुछ लोग अपने क्षेत्रीय तरीके से इसे करते हैं। लेकिन हम आपको कुछ ऐसे विधि के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि लगभग सभी जगह इसी तरीके से किया जाता है।

  • सुबह उठते ही नियमित रूप से ध्यान और पूजा करें। हनुमानजी की मूर्ति के सामने बैठ कर अपने मन में उनका स्मरण करें।
  • चारो तरफ का माहौल शांत होने पर, अपनी आंखें बंद करें और मन को शुद्ध कर ले। इस बात कर ध्यान रखें कि आप का पाठ कर रहे हैं और इससे आप हनुमानजी की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करेंगे।
  • अब, मंत्र को ध्यान से पढ़ें, अक्षर अक्षर को समझें और उसका अर्थ समझें। इससे आपका मन मंत्र में लगा रहेगा और आप अधिक संकेतों को ध्यान देंगे।
  • ध्यानपूर्वक और समर्पित बुद्धि के साथ, मंत्र का पाठ करें। हर शब्द को ध्यान से उच्चारण करें और उसका अर्थ समझें। अपने मन को मंत्र के प्रति स्थिर रखें।
  • मंत्र का पाठ के बाद, हनुमानजी से कृपा की प्रार्थना करें और आशीर्वाद लें। उन्हें धन्यवाद दें और उनसे विनती करें कि वे आपको सदैव संरक्षण और मार्गदर्शन करें।

यदि हम पाठ करने का नियमित अभ्यास हमारे जीवन में लाते है तो हमें समृद्ध, सुखी और सफल बनाता है। यह मंत्र हमें अद्वितीय शक्ति और सुरक्षा प्रदान करता है और हमारी आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायता करता है। इसलिए, हमें हमेशा का पाठ करना चाहिए और हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो।

बजरंग बाण पीडीएफ (Bajrang Baan PDF)

बजरंग बाण पीडीएफ एक डिजिटल फाइल है जिसमे की पाठ के शब्द को उपलब्ध कराया गया है। इस Bajrang baan pdf फाइल को प्राप्त करके आप इसे अपने संगठनिक या व्यक्तिगत उपयोग के लिए प्रिंट कर करा सकते है या पीडीऍफ़ फाइल अपने मोबाइल में रख सकते है।

bajarang baan pdf download

इसके अनेक फायदे है

पाठ करने से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह मंत्र हनुमानजी की कृपा, आशीर्वाद, और शक्ति को प्राप्त करने में सहायता करता है।

  • भक्ति और श्रद्धा का विकास: प्रतिदिन पाठ करने से भक्त की भक्ति और श्रद्धा में विकास होता है। हनुमानजी के इस मंत्र के द्वारा, भक्तो में गहरी आस्था और विश्वास का विकास होता है।
  • शक्ति और सामर्थ्य की प्राप्ति: इस बाण के जप से भक्त को हनुमानजी की अद्वितीय शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त होता है। मंत्र के जाप से भक्तो में ऊर्जा का अनुभव होता है और उसे सामरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनता है।
  • सुरक्षा और रक्षा की प्राप्ति: पाठ करने से सभी भक्तो को सुरक्षा और रक्षा की प्राप्ति होती है। हनुमानजी की कृपा से सभी संकटों और कष्ट से मुक्ति मिलती है और भक्त अपनी सुरक्षा को अनुभव करता है।
  • कष्टों से मुक्ति: पाठ करने से भक्तो को कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। यह मंत्र सभी भक्तो के जीवन में आने वाले कष्टों को दूर करता है और उसे सुखी बनाता है।

इस प्रकार इन सभी लाभों के अलावा, पाठ करने से भक्तो को आत्मिक और मानसिक शांति मिलती है। हनुमानजी की कृपा से उसके मन में स्थिरता और संतुलन की अनुभूति होती है।

यदि आप नियमित जप करेंगे, तो आप इन सभी लाभों को प्राप्त कर सकते हैं। पाठ के लिए नियमित समय निर्धारित करें और श्रद्धा से इसे करें। हनुमानजी की कृपा से आपका जीवन खुशहाल, सफल और समृद्ध होगा।

FAQ

क्या हर धर्म के लोग इसका पाठ कर सकते हैं?

हाँ, पाठ किसी भी धर्म के व्यक्ति कर सकते हैं। यह मंत्र सभी को शक्ति, सुख, और सफलता प्रदान करता है।

पाठ करने से व्यक्ति को कौन-कौन से संकटों से निजात मिलती है?
पाठ कितनी बार किया जाना चाहिए?
क्या पाठ भक्ति के लिए महत्वपूर्ण है?

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