Hanuman Chalisa Lyrics with Meaning in Hindi : एक दिव्य भक्ति पाठ

हनुमान चालीसा एक दिव्य भक्ति पाठ है। और जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान चालीसा लिरिक्स विथ मीनिंग इन हिंदी पढ़ता है, तो उसे न सिर्फ आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति भी मिलती है। यहां Hanuman Chalisa Lyrics with Meaning in Hindi को बहुत सरल भाषा में दिया गया है ताकि हर भक्त इसे समझ सके और हर चौपाई से जुड़ा सच्चा संदेश अपने जीवन में उतार सके।

हनुमान चालीसा लिरिक्स विथ मीनिंग इन हिंदी

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🪔 हनुमान चालीसा लिरिक्स 🪔

दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि, बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि। अर्थ- अपने गुरु के पवित्र चरणों की धूल से मैं अपने मन के दर्पण को साफ करता हूँ और फिर भगवान श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चार सबसे बड़े सुख — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — प्रदान करते हैं।… बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार, बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार। अर्थ- हे पवनपुत्र हनुमानजी! मैं खुद को बुद्धि और शक्ति में छोटा समझकर आपकी शरण में आया हूँ। कृपा करके मुझे बल, बुद्धि और ज्ञान दें, और मेरे सारे दुःख और दोषों को दूर करें।… चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर॥ जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥1॥ अर्थ- हे गुण और ज्ञान के सागर, श्री हनुमान जी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। आपकी महिमा तीनों लोकों में फैली हुई है।… रामदूत अतुलित बल धामा॥ अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥2॥ अर्थ- आप भगवान श्रीराम के परम भक्त और उनके दूत हैं। आप अनंत बल के धाम हैं। आपकी माता अंजनी और पिता पवनदेव हैं, इसलिए आपको “पवनपुत्र” कहा जाता है।… महाबीर बिक्रम बजरंगी॥ कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥ अर्थ-हे महावीर बजरंगबली! आप अपार शक्ति के मालिक हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी सोच वालों के सच्चे साथी हैं।… कंचन बरन बिराज सुबेसा॥ कानन कुंडल कुंचित केसा ॥4॥ अर्थ- आपका शरीर सोने के समान चमकदार है। आप सुंदर वस्त्र पहने हुए हैं, कानों में कुंडल हैं और आपके घुंघराले बाल आपको और भी आकर्षक बनाते हैं।… हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै॥ काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥ अर्थ- आपके हाथ में गदा (बज्र) और ध्वज (झंडा) है। आपके कंधे पर जनेऊ है, जो आपके ब्रह्मचर्य और तेज का प्रतीक है।… संकर सुवन केसरीनंदन ॥ तेज प्रताप महा जग बंदन॥6॥ अर्थ-हे केसरीनंदन, हे भगवान शिव के अंशरूप! आपका तेज और पराक्रम इतना महान है कि पूरा संसार आपकी वंदना करता है।… बिद्यावान गुनी अति चातुर॥ राम काज करिबे को आतुर॥7॥ अर्थ- आप अत्यंत ज्ञानी, गुणवान और चतुर हैं। आप सदा प्रभु श्रीराम के कार्यों को पूरा करने के लिए उत्सुक रहते हैं।… प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया॥ राम लखन सीता मन बसिया॥8॥ अर्थ- आपको भगवान श्रीराम की कथाएँ सुनना बहुत प्रिय है। आपके हृदय में श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता सदैव निवास करते हैं।… सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा॥ बिकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥ अर्थ- लंका में, आपने माता सीता को सांत्वना देने के लिए अपना सूक्ष्म रूप धारण किया और वहीं, अपने विकराल रूप से रावण की सोने की नगरी को जलाकर भस्म कर दिया।… भीम रूप धरि असुर सँहारे॥ रामचन्द्र के काज सँवारे ॥10॥ अर्थ- आपने राक्षसों का संहार करने के लिए भयंकर रूप धारण किया और भगवान श्रीराम के सभी कार्यों को सफल बनाया।… लाय सजीवन लखन जियाये॥ श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥11॥ अर्थ- आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को फिर से जीवित कर दिया। इस पर भगवान श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए और आपको अपने हृदय से लगाकर प्रेमपूर्वक गले लगा लिया।… रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई॥ तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥12॥ अर्थ- भगवान श्रीराम ने आपकी अनुपम भक्ति और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा—”हे हनुमान! तुम मुझे भरत के समान ही प्रिय हो।… सहस बदन तुम्हरो जस गावैं॥ अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥13॥ अर्थ- आपकी महिमा इतनी विशाल है कि स्वयं सहस्त्र मुख वाले शेषनाग भी उसका पूरा वर्णन नहीं कर सकते। भगवान श्रीराम (जो स्वयं विष्णु के रूप हैं) ने यह कहकर आपको अपने गले से लगाया।… सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ॥ नारद सारद सहित अहीसा ॥14॥ अर्थ-सनक, सनंदन जैसे ऋषि, ब्रह्मा जी, नारद जी, माता सरस्वती और स्वयं शेषनाग भी आपकी महिमा का पूर्ण वर्णन करने में असमर्थ हैं।… जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते॥ कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥ अर्थ- ययमराज, कुबेर और अन्य सभी दिशाओं के रक्षक देवता भी आपकी महिमा की सीमा नहीं जान सकते। फिर भला कोई कवि या विद्वान उसे पूरी तरह कैसे बता सकता है?… तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ॥ राम मिलाय राज पद दीन्हा॥16॥ अर्थ- आपने सुग्रीव पर बहुत बड़ा उपकार किया। उन्हें श्रीराम से मिलवाया और उनकी मदद से उनका खोया हुआ राज्य फिर से दिलाया।… तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना॥ लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥ अर्थ- हे महावीर हनुमान जी! आपके उपदेशों का पालन कर विभीषण ने भी अपने जीवन को धन्य किया और अंततः लंका के सम्राट बने। इस सत्य को समस्त संसार जानता है।… जुग सहस्र जोजन पर भानू॥ लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥ अर्थ- आपकी अद्भुत शक्ति का प्रमाण यह है कि जब आप बालक थे, तब सूर्यदेव, जो सहस्त्रों योजन दूर स्थित हैं, उन्हें आपने एक मीठे फल के समान निगल लिया था।… प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं॥ जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥19॥ अर्थ- भगवान श्रीराम की अंगूठी को अपने मुख में रखकर आपने विशाल समुद्र पार किया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि आपकी भक्ति और पराक्रम के समक्ष असंभव कुछ भी नहीं।… दुर्गम काज जगत के जेते॥ सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥ अर्थ- आपकी कृपा से संसार के सबसे कठिन कार्य भी सहजता से पूर्ण हो जाते हैं। जो भी आपकी शरण में आता है, उसकी सभी बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं।… राम दुआरे तुम रखवारे॥ होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥ अर्थ- आप प्रभु श्रीराम जी के द्वारपाल हैं और आपकी आज्ञा के बिना वहाँ प्रवेश असंभव है। भगवान राम के दर्शन भी केवल आपकी कृपा से ही संभव होते हैं।… सब सुख लहै तुम्हारी सरना॥ तुम रक्षक काहू को डर ना॥22॥ अर्थ- जो व्यक्ति आपकी शरण में आता है, वह जीवन के समस्त सुखों को प्राप्त करता है। जब आप रक्षक हैं, तो किसी भी प्रकार का भय उसके निकट नहीं आ सकता।… आपन तेज सम्हारो आपै॥ तीनों लोक हाँक तें कॉपै॥23॥ अर्थ- आपकी अपार ऊर्जा और तेजस्विता ऐसी है कि इसे आप स्वयं ही नियंत्रित कर सकते हैं। जब आप गर्जना करते हैं, तो तीनों लोक थर्रा उठते हैं।… भूत पिसाच निकट नहिं आवै॥ महाबीर जब नाम सुनावै॥24॥ अर्थ- हे महावीर! आपके नाम का स्मरण मात्र से ही भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियाँ निकट नहीं आ पातीं।… नासै रोग हरै सब पीरा॥ जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥ अर्थ- हे वीर बजरंगबली! जो भी श्रद्धा और भक्ति से आपका निरंतर जप करता है, उसके सभी रोग, कष्ट और पीड़ाएँ स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं।… संकट तें हनुमान छुडावै॥ मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥ अर्थ- जो लोग मन, वचन और कर्म से आपका ध्यान करते हैं, वे जीवन की समस्त कठिनाइयों से मुक्त होकर दिव्य आनंद की अनुभूति करते हैं।… सब पर राम तपस्वी राजा॥ तिन के काज सकल तुम साजा॥27॥ अर्थ- आप प्रभु श्रीराम जी के अनन्य भक्त हैं और उन सभी भक्तों के कार्य सिद्ध करते हैं, जो स्वयं को श्रीराम जी के चरणों में समर्पित करते हैं।… और मनोरथ जो कोई लावै॥ सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥ अर्थ- जो भी आपकी कृपा का पात्र बनता है, उसे जीवन में सर्वोच्च सिद्धियाँ और दिव्य फल प्राप्त होते हैं।… चारों जुग परताप तुम्हारा॥ है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥ अर्थ- आपकी महिमा चारों युगों — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग — में समान रूप से प्रसिद्ध है। आपके तेज से संपूर्ण संसार प्रकाशमान है और आपकी कीर्ति हर युग में गूँजती है।… साधु सन्त के तुम रखवारे॥ असुर निकन्दन राम दुलारे॥30॥ अर्थ-आप सज्जनों, भक्तों और संतों के सच्चे रक्षक हैं। आप दुष्टों और राक्षसों का नाश करते हैं। आप भगवान श्रीराम के अत्यंत प्रिय और उनके लाडले भक्त हैं।… अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता॥ अस बर दीन जानकी माता॥31॥ अर्थ- माता सीता ने आपको यह वरदान दिया कि आप अपने भक्तों को आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ प्रदान कर सकते हैं। आपकी भक्ति से ही सांसारिक और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त होती है।… राम रसायन तुम्हरे पासा॥ सदा रहो रघुपति के दासा ॥32॥ अर्थ-आपके पास श्रीराम नाम का अमृत समान भक्ति-रस है। आप सदैव श्रीरामजी की सेवा में लीन रहते हैं और रामभक्ति ही आपके जीवन का सार है।… तुम्हरे भजन राम को पावै॥ जनम जनम के दुख बिसरावै ॥33॥ अर्थ- जो व्यक्ति आपका भजन करता है, उसे प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। वह जन्म-जन्मांतर के दुखों से मुक्त होकर आनंदमय जीवन पाता है।… अंत काल रघुबर पुर जाई॥ जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥34॥ अर्थ- जो व्यक्ति आपकी आराधना करता है, मृत्यु के बाद वह श्रीराम के परमधाम को प्राप्त करता है। और यदि वह फिर जन्म लेता है, तो वह सदा भगवान का भक्त ही कहलाता है।… और देवता चित्त न धरई॥ हनुमत सेई सर्ब सुख करई॥35॥ अर्थ- जो भक्त अन्य देवताओं की पूजा न करके केवल श्रीहनुमानजी की भक्ति करता है, उसे जीवन के सभी सुख प्राप्त होते हैं, क्योंकि हनुमानजी की कृपा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।… संकट कटै मिटै सब पीरा॥ जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥ अर्थ- हे बलवान हनुमानजी! जो भी आपका स्मरण करता है, उसके सभी संकट मिट जाते हैं और उसके जीवन से हर प्रकार का दुख समाप्त हो जाता है।… जै जै जै हनुमान गोसाईं॥ कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥37॥ अर्थ- हे श्रीहनुमानजी! आपकी जय हो, बार-बार जय हो! हे गोसाईं, आप हम पर वैसे ही कृपा करें जैसे एक गुरु अपने शिष्य पर करता है।… जो सत बार पाठ कर कोई॥ छूटहि बंदि महा सुख होई॥38॥ अर्थ-जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करता है, वह सभी बंधनों से मुक्त होकर परम सुख को प्राप्त करता है।… जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा॥ होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥ अर्थ- जो कोई नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं भगवान शिव (गौरीशंकर) ने की है।.. तुलसीदास सदा हरि चेरा॥ कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥40॥ अर्थ- गोस्वामी तुलसीदास जी निवेदन करते हैं—हे हनुमान जी! मैं सदा प्रभु श्रीराम का सेवक और भक्त बना रहूँ, और आप सदा मेरे हृदय में वास करें।.. दोहा पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप॥ राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥ अर्थ- गोस्वामी तुलसीदास जी विनम्रता से प्रार्थना करते हैं — “हे प्रभु हनुमान! मैं सदा श्रीराम का सेवक बना रहूँ। कृपा करके आप मेरे हृदय में सदा निवास करें।…

🌸🌼🌺 जय श्री हनुमान 🌺🌼🌸

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हनुमान चालीसा लिरिक्स विथ मीनिंग इन हिंदी

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि,
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

अर्थ- अपने गुरु के पवित्र चरणों की धूल से मैं अपने मन के दर्पण को साफ करता हूँ और फिर भगवान श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चार सबसे बड़े सुख — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — प्रदान करते हैं।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार,
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।

अर्थ- हे पवनपुत्र हनुमानजी! मैं खुद को बुद्धि और शक्ति में छोटा समझकर आपकी शरण में आया हूँ। कृपा करके मुझे बल, बुद्धि और ज्ञान दें, और मेरे सारे दुःख और दोषों को दूर करें।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर॥
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥1॥

अर्थ- हे गुण और ज्ञान के सागर, श्री हनुमान जी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। आपकी महिमा तीनों लोकों में फैली हुई है।

रामदूत अतुलित बल धामा॥
अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥2॥

अर्थ- आप भगवान श्रीराम के परम भक्त और उनके दूत हैं। आप अनंत बल के धाम हैं। आपकी माता अंजनी और पिता पवनदेव हैं, इसलिए आपको “पवनपुत्र” कहा जाता है।

महाबीर बिक्रम बजरंगी॥
कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥

अर्थ- हे महावीर बजरंगबली! आप अपार शक्ति के मालिक हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी सोच वालों के सच्चे साथी हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा॥
कानन कुंडल कुंचित केसा ॥4॥

अर्थ- आपका शरीर सोने के समान चमकदार है। आप सुंदर वस्त्र पहने हुए हैं, कानों में कुंडल हैं और आपके घुंघराले बाल आपको और भी आकर्षक बनाते हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै॥
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥

अर्थ- आपके हाथ में गदा (बज्र) और ध्वज (झंडा) है। आपके कंधे पर जनेऊ है, जो आपके ब्रह्मचर्य और तेज का प्रतीक है।

संकर सुवन केसरीनंदन ॥
तेज प्रताप महा जग बंदन॥6॥

अर्थ- हे केसरीनंदन, हे भगवान शिव के अंशरूप! आपका तेज और पराक्रम इतना महान है कि पूरा संसार आपकी वंदना करता है।

बिद्यावान गुनी अति चातुर॥
राम काज करिबे को आतुर॥7॥

अर्थ- आप अत्यंत ज्ञानी, गुणवान और चतुर हैं। आप सदा प्रभु श्रीराम के कार्यों को पूरा करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया॥
राम लखन सीता मन बसिया॥8॥

अर्थ- आपको भगवान श्रीराम की कथाएँ सुनना बहुत प्रिय है। आपके हृदय में श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता सदैव निवास करते हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा॥
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥

अर्थ- लंका में, आपने माता सीता को सांत्वना देने के लिए अपना सूक्ष्म रूप धारण किया और वहीं, अपने विकराल रूप से रावण की सोने की नगरी को जलाकर भस्म कर दिया।

भीम रूप धरि असुर सँहारे॥
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥10॥

अर्थ- आपने राक्षसों का संहार करने के लिए भयंकर रूप धारण किया और भगवान श्रीराम के सभी कार्यों को सफल बनाया।

लाय सजीवन लखन जियाये॥
श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥11॥

अर्थ- आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को फिर से जीवित कर दिया। इस पर भगवान श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए और आपको अपने हृदय से लगाकर प्रेमपूर्वक गले लगा लिया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई॥
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥12॥

अर्थ- भगवान श्रीराम ने आपकी अनुपम भक्ति और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा—"हे हनुमान! तुम मुझे भरत के समान ही प्रिय हो।"

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं॥
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥13॥

अर्थ- आपकी महिमा इतनी विशाल है कि स्वयं सहस्त्र मुख वाले शेषनाग भी उसका पूरा वर्णन नहीं कर सकते। भगवान श्रीराम (जो स्वयं विष्णु के रूप हैं) ने यह कहकर आपको अपने गले से लगाया।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ॥
नारद सारद सहित अहीसा ॥14॥

अर्थ- सनक, सनंदन जैसे ऋषि, ब्रह्मा जी, नारद जी, माता सरस्वती और स्वयं शेषनाग भी आपकी महिमा का पूर्ण वर्णन करने में असमर्थ हैं।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते॥
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥

अर्थ- ययमराज, कुबेर और अन्य सभी दिशाओं के रक्षक देवता भी आपकी महिमा की सीमा नहीं जान सकते। फिर भला कोई कवि या विद्वान उसे पूरी तरह कैसे बता सकता है?

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ॥
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥16॥

अर्थ- आपने सुग्रीव पर बहुत बड़ा उपकार किया। उन्हें श्रीराम से मिलवाया और उनकी मदद से उनका खोया हुआ राज्य फिर से दिलाया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना॥
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥

अर्थ- हे महावीर हनुमान जी! आपके उपदेशों का पालन कर विभीषण ने भी अपने जीवन को धन्य किया और अंततः लंका के सम्राट बने। इस सत्य को समस्त संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू॥
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥

अर्थ- आपकी अद्भुत शक्ति का प्रमाण यह है कि जब आप बालक थे, तब सूर्यदेव, जो सहस्त्रों योजन दूर स्थित हैं, उन्हें आपने एक मीठे फल के समान निगल लिया था।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं॥
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥19॥

अर्थ- भगवान श्रीराम की अंगूठी को अपने मुख में रखकर आपने विशाल समुद्र पार किया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि आपकी भक्ति और पराक्रम के समक्ष असंभव कुछ भी नहीं।

दुर्गम काज जगत के जेते॥
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥

अर्थ- आपकी कृपा से संसार के सबसे कठिन कार्य भी सहजता से पूर्ण हो जाते हैं। जो भी आपकी शरण में आता है, उसकी सभी बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे॥
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥

अर्थ- आप प्रभु श्रीराम जी के द्वारपाल हैं और आपकी आज्ञा के बिना वहाँ प्रवेश असंभव है। भगवान राम के दर्शन भी केवल आपकी कृपा से ही संभव होते हैं।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना॥
तुम रक्षक काहू को डर ना॥22॥

अर्थ- जो व्यक्ति आपकी शरण में आता है, वह जीवन के समस्त सुखों को प्राप्त करता है। जब आप रक्षक हैं, तो किसी भी प्रकार का भय उसके निकट नहीं आ सकता।

आपन तेज सम्हारो आपै॥
तीनों लोक हाँक तें कॉपै॥23॥

अर्थ- आपकी अपार ऊर्जा और तेजस्विता ऐसी है कि इसे आप स्वयं ही नियंत्रित कर सकते हैं। जब आप गर्जना करते हैं, तो तीनों लोक थर्रा उठते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै॥
महाबीर जब नाम सुनावै॥24॥

अर्थ- हे महावीर! आपके नाम का स्मरण मात्र से ही भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियाँ निकट नहीं आ पातीं।

नासै रोग हरै सब पीरा॥
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥

अर्थ- हे वीर बजरंगबली! जो भी श्रद्धा और भक्ति से आपका निरंतर जप करता है, उसके सभी रोग, कष्ट और पीड़ाएँ स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं।

संकट तें हनुमान छुडावै॥
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥

अर्थ- जो लोग मन, वचन और कर्म से आपका ध्यान करते हैं, वे जीवन की समस्त कठिनाइयों से मुक्त होकर दिव्य आनंद की अनुभूति करते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा॥
तिन के काज सकल तुम साजा॥27॥

अर्थ- आप प्रभु श्रीराम जी के अनन्य भक्त हैं और उन सभी भक्तों के कार्य सिद्ध करते हैं, जो स्वयं को श्रीराम जी के चरणों में समर्पित करते हैं।

और मनोरथ जो कोई लावै॥
सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

अर्थ- जो भी आपकी कृपा का पात्र बनता है, उसे जीवन में सर्वोच्च सिद्धियाँ और दिव्य फल प्राप्त होते हैं।

चारों जुग परताप तुम्हारा॥
है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥

अर्थ- आपकी महिमा चारों युगों — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग — में समान रूप से प्रसिद्ध है। आपके तेज से संपूर्ण संसार प्रकाशमान है और आपकी कीर्ति हर युग में गूँजती है।

साधु सन्त के तुम रखवारे॥
असुर निकन्दन राम दुलारे॥30॥

अर्थ-आप सज्जनों, भक्तों और संतों के सच्चे रक्षक हैं। आप दुष्टों और राक्षसों का नाश करते हैं। आप भगवान श्रीराम के अत्यंत प्रिय और उनके लाडले भक्त हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता॥
अस बर दीन जानकी माता॥31॥

अर्थ- माता सीता ने आपको यह वरदान दिया कि आप अपने भक्तों को आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ प्रदान कर सकते हैं। आपकी भक्ति से ही सांसारिक और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त होती है।

राम रसायन तुम्हरे पासा॥
सदा रहो रघुपति के दासा ॥32॥

अर्थ- आपके पास श्रीराम नाम का अमृत समान भक्ति-रस है। आप सदैव श्रीरामजी की सेवा में लीन रहते हैं और रामभक्ति ही आपके जीवन का सार है।

तुम्हरे भजन राम को पावै॥
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥33॥

अर्थ- जो व्यक्ति आपका भजन करता है, उसे प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। वह जन्म-जन्मांतर के दुखों से मुक्त होकर आनंदमय जीवन पाता है।

अंत काल रघुबर पुर जाई॥
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥34॥

अर्थ- जो व्यक्ति आपकी आराधना करता है, मृत्यु के बाद वह श्रीराम के परमधाम को प्राप्त करता है। और यदि वह फिर जन्म लेता है, तो वह सदा भगवान का भक्त ही कहलाता है।

और देवता चित्त न धरई॥
हनुमत सेई सर्ब सुख करई॥35॥

अर्थ- जो भक्त अन्य देवताओं की पूजा न करके केवल श्रीहनुमानजी की भक्ति करता है, उसे जीवन के सभी सुख प्राप्त होते हैं, क्योंकि हनुमानजी की कृपा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

संकट कटै मिटै सब पीरा॥
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

अर्थ- हे बलवान हनुमानजी! जो भी आपका स्मरण करता है, उसके सभी संकट मिट जाते हैं और उसके जीवन से हर प्रकार का दुख समाप्त हो जाता है।

जै जै जै हनुमान गोसाईं॥
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥37॥

अर्थ- हे श्रीहनुमानजी! आपकी जय हो, बार-बार जय हो! हे गोसाईं, आप हम पर वैसे ही कृपा करें जैसे एक गुरु अपने शिष्य पर करता है।

जो सत बार पाठ कर कोई॥
छूटहि बंदि महा सुख होई॥38॥

अर्थ- जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करता है, वह सभी बंधनों से मुक्त होकर परम सुख को प्राप्त करता है।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा॥
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥

अर्थ- जो कोई नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं भगवान शिव (गौरीशंकर) ने की है।

तुलसीदास सदा हरि चेरा॥
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥40॥

अर्थ- गोस्वामी तुलसीदास जी निवेदन करते हैं—हे हनुमान जी! मैं सदा प्रभु श्रीराम का सेवक और भक्त बना रहूँ, और आप सदा मेरे हृदय में वास करें।

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप॥
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

अर्थ- गोस्वामी तुलसीदास जी विनम्रता से प्रार्थना करते हैं — “हे प्रभु हनुमान! मैं सदा श्रीराम का सेवक बना रहूँ। कृपा करके आप मेरे हृदय में सदा निवास करें।”

कई भक्तों के लिए Hanuman Chalisa Lyrics with Meaning Image एक आसान तरीका है याद रखने और साझा करने का।आप इसे अपने मोबाइल या मंदिर की दीवार पर लगा सकते हैं ताकि हर सुबह श्री हनुमान जी की कृपा दृष्टि बनी रहे। इसी तरह आपहनुमान जी वॉलपेपर, हनुमान जी के सुविचार, और हनुमान मंत्र इमेज भी डाउनलोड कर सकते हैं।

Hanuman Chalisa PDF with Meaning in Hindi

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Hanuman Chalisa Lyrics Video with Meaning

जो भक्त श्रवण के माध्यम से भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए यहाँ Hanuman Chalisa Lyrics with Meaning Video भी दिया गया है। इस वीडियो में हर चौपाई के साथ उसका अर्थ सुनाई देता है, जिससे मन और आत्मा दोनों को शांति मिलती है। अगर आप चाहें, तो हनुमान भजन वीडियो या जय बजरंगबली पाठ वीडियो भी देख सकते हैं जो आपकी आराधना को और सशक्त बनाएँगे।

हनुमान चालीसा लिरिक्स विथ मीनिंग इन हिंदी का पाठ हमें यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति विनम्रता में और सच्ची भक्ति सेवा में होती है। इसको आप Hanuman Chalisa Lyrics and Meaning in English भी देख सकते है जो समझने में और सरल है। इसके अलावा सुंदरकांड लिखित में भी अवश्य पढ़ें। शुद्ध मन, संयम और सही पाठ विधि से किया गया पाठ ही साधक को इसके वास्तविक पाठ के दिव्य लाभ प्रदान करता है।

FAQ

हनुमान चालीसा अर्थ सहित पढ़ने से क्या लाभ होता है?

जब हम अर्थ सहित चालीसा पढ़ते हैं, तो हर चौपाई का भाव हमारे मन में उतरता है और भक्ति गहरी होती है।

क्या बच्चे भी हनुमान चालीसा अर्थ सहित पढ़ सकते हैं?

क्या इसको सुनना उतना ही प्रभावी है जितना पढ़ना?

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