Shri Salasar Balaji Arti Lyrics : भक्ति और चमत्कारों से जुड़ी पावन आरती

राजस्थान के प्रसिद्ध बालाजी धाम, सालासर में स्थित श्री सालासर बालाजी को मनोकामना पूर्ण करने वाला देव माना जाता है। श्री सालासर बालाजी आरती लिरिक्स का पाठ भक्तों के हृदय को शांति और साहस से भर देता है। यह आरती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्त और प्रभु के बीच सच्चे संबंध का प्रतीक है। Shri Salasar Balaji Arti Lyrics के बोल कुछ इस प्रकार से है-

श्री सालासर बालाजी आरती लिरिक्स

जयति जय जय बजरंग बाला,
कृपा कर सालासर वाला।

चैत सुदी पूनम को जन्मे,
अंजनी पवन ख़ुशी मन में ।

प्रकट भय सुर वानर तन में,
विदित यस विक्रम त्रिभुवन में।

दूध पीवत स्तन मात के,
नजर गई नभ ओर।

तब जननी की गोद से पहुंचे,
उदयाचल पर भोर।

अरुण फल लखि रवि मुख डाला,
कृपा कर सालासर वाला।

तिमिर भूमण्डल में छाई,
चिबुक पर इन्द्र बज बाए।

तभी से हनुमत कहलाए,
द्वय हनुमान नाम पाये।

उस अवसर में रुक गयो,
पवन सर्व उन्चास ।

इधर हो गयो अन्धकार,
उत रुक्यो विश्व को श्वास।

भये ब्रह्मादिक बेहाला,
कृपा कर सालासर वाला।

देव सब आये तुम्हारे आगे,
सकल मिल विनय करन लागे।

पवन कू भी लाए सागे,
क्रोध सब पवन तना भागे।

सभी देवता वर दियो,
अरज करी कर जोड़।

सुनके सबकी अरज गरज,
लखि दिया रवि को छोड़।

हो गया जगमें उजियाला,
कृपा कर सालासर वाला।

रहे सुग्रीव पास जाई,
आ गये बनमें रघुराई।

हरिरावणसीतामाई,
विकलफिरतेदोनों भाई।

विप्ररूप धरि राम को,
कहा आप सब हाल।

कपि पति से करवाई मित्रता,
मार दिया कपि बाल।

दुःख सुग्रीव तना टाला,
कृपा कर सालासर वाला।

आज्ञा ले रघुपति की धाया,
लंक में सिन्धु लाँघ आया।

हाल सीता का लख पाया,
मुद्रिका दे बनफल खाया।

बन विध्वंस दशकंध सुत,
वध कर लंक जलाया।

चूड़ामणि सन्देश त्रिया का,
दिया राम को आय।

हुए खुश त्रिभुवन भूपाला ,
कृपा कर सालासर वाला।

जोड़ कपि दल रघुवर चाला,
कटक हित सिन्धु बांध डाला।

युद्ध रच दीन्हा विकराला,
कियो राक्षस कुल पैमाला।

लक्ष्मण को शक्ति लगी,
लायौ गिरी उठाय।

देई संजीवन लखन जियाये,
रघुवर हर्ष सवाय।

गरब सब रावन का गाला ,
कृपा कर सालासर वाला।

रची अहिरावन ने माया,
सोवते राम लखन लाया ।

बने वहाँ देवी की काया,
करने को अपना चित चाया।

अहिरावन रावन हत्यौ,
फेर हाथ को हाथ।

मन्त्र विभीषण पाय आप को,
हो गयो लंका नाथ।

खुल गया करमा का ताला,
कृपा कर सालासर वाला।

अयोध्या राम राज्य कीना,
आपको दास बना लीना।

अतुल बल घृत सिन्दूर दीना,
लसत तन रूप रंग भीना।

चिरंजीव प्रभु ने कियो,
जग में दियो पुजाय।

जो कोई निश्चय कर के ध्यावै,
ताकी करो सहाय।

कष्ट सब भक्तन का टाला,
कृपा कर सालासर वाला।

भक्तजन चरण कमल सेवे,
जात आय सालासर देवे।

ध्वजा नारियल भोग देवे,
मनोरथ सिद्धि कर लेवे।

कारज सारो भक्त के,
सदा करो कल्यान।

विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के,
बालकृष्ण धर ध्यान।

नाम की जपे सदा माला,
कृपा कर सालासर।

श्री सालासर बालाजी आरती लिरिक्स

जयति जय जय बजरंग बाला,
कृपा कर सालासर वाला।

चैत सुदी पूनम को जन्मे,
अंजनी पवन ख़ुशी मन में ।

प्रकट भय सुर वानर तन में,
विदित यस विक्रम त्रिभुवन में।

दूध पीवत स्तन मात के,
नजर गई नभ ओर।

तब जननी की गोद से पहुंचे,
उदयाचल पर भोर।

अरुण फल लखि रवि मुख डाला,
कृपा कर सालासर वाला।

तिमिर भूमण्डल में छाई,
चिबुक पर इन्द्र बज बाए।

तभी से हनुमत कहलाए,
द्वय हनुमान नाम पाये।

उस अवसर में रुक गयो,
पवन सर्व उन्चास ।

इधर हो गयो अन्धकार,
उत रुक्यो विश्व को श्वास।

भये ब्रह्मादिक बेहाला,
कृपा कर सालासर वाला।

देव सब आये तुम्हारे आगे,
सकल मिल विनय करन लागे।

पवन कू भी लाए सागे,
क्रोध सब पवन तना भागे।

सभी देवता वर दियो,
अरज करी कर जोड़।

सुनके सबकी अरज गरज,
लखि दिया रवि को छोड़।

हो गया जगमें उजियाला,
कृपा कर सालासर वाला।

रहे सुग्रीव पास जाई,
आ गये बनमें रघुराई।

हरिरावणसीतामाई,
विकलफिरतेदोनों भाई।

विप्ररूप धरि राम को,
कहा आप सब हाल।

कपि पति से करवाई मित्रता,
मार दिया कपि बाल।

दुःख सुग्रीव तना टाला,
कृपा कर सालासर वाला।

आज्ञा ले रघुपति की धाया,
लंक में सिन्धु लाँघ आया।

हाल सीता का लख पाया,
मुद्रिका दे बनफल खाया।

बन विध्वंस दशकंध सुत,
वध कर लंक जलाया।

चूड़ामणि सन्देश त्रिया का,
दिया राम को आय।

हुए खुश त्रिभुवन भूपाला ,
कृपा कर सालासर वाला।

जोड़ कपि दल रघुवर चाला,
कटक हित सिन्धु बांध डाला।

युद्ध रच दीन्हा विकराला,
कियो राक्षस कुल पैमाला।

लक्ष्मण को शक्ति लगी,
लायौ गिरी उठाय।

देई संजीवन लखन जियाये,
रघुवर हर्ष सवाय।

गरब सब रावन का गाला ,
कृपा कर सालासर वाला।

रची अहिरावन ने माया,
सोवते राम लखन लाया ।

बने वहाँ देवी की काया,
करने को अपना चित चाया।

अहिरावन रावन हत्यौ,
फेर हाथ को हाथ।

मन्त्र विभीषण पाय आप को,
हो गयो लंका नाथ।

खुल गया करमा का ताला,
कृपा कर सालासर वाला।

अयोध्या राम राज्य कीना,
आपको दास बना लीना।

अतुल बल घृत सिन्दूर दीना,
लसत तन रूप रंग भीना।

चिरंजीव प्रभु ने कियो,
जग में दियो पुजाय।

जो कोई निश्चय कर के ध्यावै,
ताकी करो सहाय।

कष्ट सब भक्तन का टाला,
कृपा कर सालासर वाला।

भक्तजन चरण कमल सेवे,
जात आय सालासर देवे।

ध्वजा नारियल भोग देवे,
मनोरथ सिद्धि कर लेवे।

कारज सारो भक्त के,
सदा करो कल्यान।

विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के,
बालकृष्ण धर ध्यान।

नाम की जपे सदा माला,
कृपा कर सालासर।

सालासर बालाजी की आरती को भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त हर मंगलवार या शनिवार को इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन के बड़े से बड़े संकट समाप्त हो जाते हैं।

Shri Salasar Balaji Arti Lyrics PDF

भक्तों की सुविधा के लिए Shri Salasar Balaji Arti PDF उपलब्ध है, ताकि आप इसे किसी भी समय पढ़ सकें या पूजा के दौरान इसका प्रयोग कर सकें। इस PDF में आरती के पूरे शब्द साफ़ और सुंदर देवनागरी लिपि में दिए गए हैं, जिससे पाठ आसान और सटीक बनता है।

श्री सालासर बालाजी आरती इमेज

भक्त अपने घर या कार्यस्थल पर Shri Salasar Balaji Arti Image लगाकर हर दिन आरती के भाव को अनुभव कर सकते हैं। इस इमेज में आपको आरती लिरिक्स एकदम साफ और स्वच्छ रूप से प्राप्त हो जाते है, जो आपके पाठ को सरल बना देता है। यह इमेज श्रद्धा, सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रतीक है — जो हर सुबह आपको दिव्यता से जोड़ती है।

Shri Salasar Balaji Arti Video / Audio

अगर आप बालाजी आरती का आनंद संगीत और भावनाओं के साथ लेना चाहते हैं, तो इसका वीडियो और ऑडियो वर्शन सबसे उपयुक्त माध्यम है। आरती के दौरान जब बालाजी का नाम गूंजता है, तो मन में भक्ति की लहर दौड़ जाती है और वातावरण पवित्रता से भर जाता है।

सालासर बालाजी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का जीवंत केंद्र है। माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से श्री सालासर बालाजी आरती लिरिक्स का पाठ करता है या नित्य Hanuman Chalisa Paath करता है, उसका जीवन नई दिशा पाता है। अगर आप अपने दिन की शुरुआत Hanuman Ji Ki Aarti या Karya Siddhi Hanuman Mantra से करते हैं, तो निश्चय ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बना रहता है।

FAQ

क्या आरती केवल मंदिर में ही की जा सकती है?

सालासर बालाजी आरती के बोल किसने लिखे हैं?

बालाजी आरती को कितनी बार पढ़ा जा सकता है?

आप इसे सुबह और शाम, दोनों समय श्रद्धा भाव से पढ़ या गा सकते हैं। कोई कठोर नियम नहीं है — भावना ही आरती की आत्मा है।

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