Sankat Mochan Lyrics: संकटों से मुक्ति देने वाला हनुमान स्तोत्र

संकट मोचन लिरिक्स भगवान हनुमान जी की महिमा का बखान करने वाला पवित्र स्तोत्र है, जो भक्त को जीवन के हर संकट और भय से मुक्त करता है। जब व्यक्ति असमंजस, कठिनाइयों या मानसिक अशांति से घिरा होता है, तो इस स्तोत्र का पाठ उसके जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास लाता है। यह Sankat Mochan Lyrics इस प्रकार से है :

संकट मोचन लिरिक्स

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🪔 संकट मोचन लिरिक्स 🪔

बाल समय रवि भक्ष लियो, तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों॥ ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टार॥ देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो॥ चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो॥ कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो॥ जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहां पगु धारो॥ हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो॥ ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो॥ चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो॥ लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो॥ आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो॥ श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो॥ आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो॥ देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो॥ जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो॥ कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो॥ बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ॥ दोहा॥ लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर॥ वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥ जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान॥

🌸🌼🌺 जय श्री हनुमान 🌺🌼🌸

यह भय, रोग, शत्रु और दुखों से मुक्ति दिलाता है। जब मन विचलित होता है, तो इसका पाठ आपको स्थिरता और साहस प्रदान करता है। भक्त मानते हैं कि संकटों के समय हनुमान जी “मोचन” यानी मुक्ति देने वाले रूप में प्रकट होते हैं।लेकिन केवल पाठ करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सही पाठ विधि के अनुसार किया गया पाठ ही भक्त को इसके संपूर्ण लाभ तक पहुंचाता है।

Sankat Mochan PDF Download

Sankat-Mochan-Lyrics

जो भक्त नियमित रूप से पाठ करना चाहते हैं, उनके लिए Sankat Mochan PDF Download एक आदर्श विकल्प है। इससे आप इसे कभी भी, कहीं भी पढ़ सकते हैं — चाहे घर पर हों या यात्रा में। PDF स्वरूप में इसे सहेजने से आप हमेशा हनुमान भक्ति से जुड़े रहते हैं और अपने जीवन में साहस और शांति का अनुभव करते हैं।

Sankat Mochan Lyrics Video

अगर आप भक्ति को श्रवण के रूप में अनुभव करना चाहते हैं, तो sankat mochan hanuman ashtak lyrics Video आपकी आत्मा को शांति देने का सबसे सुंदर माध्यम है। मधुर संगीत के साथ इसका पाठ सुनने से मन की सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है और श्रद्धा का भाव कई गुना बढ़ जाता है।

Sankat Mochan Hanuman Lyrics Image

संकट मोचन लिरिक्स

बाल समय रवि भक्ष लियो, 
तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों॥

ताहि सों त्रास भयो जग को, 
यह संकट काहु सों जात न टार॥

देवन आनि करी बिनती तब, 
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, 
जात महाप्रभु पंथ निहारो॥

चौंकि महामुनि साप दियो तब, 
चाहिए कौन बिचार बिचारो॥

कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, 
सो तुम दास के सोक निवारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

अंगद के संग लेन गए सिय, 
खोज कपीस यह बैन उचारो॥

जीवत ना बचिहौ हम सो जु, 
बिना सुधि लाये इहां पगु धारो॥

हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, 
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

रावण त्रास दई सिय को सब, 
राक्षसी सों कही सोक निवारो॥

ताहि समय हनुमान महाप्रभु, 
जाए महा रजनीचर मरो॥

चाहत सीय असोक सों आगि सु, 
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

बान लाग्यो उर लछिमन के तब, 
प्राण तजे सूत रावन मारो॥

लै गृह बैद्य सुषेन समेत, 
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो॥

आनि सजीवन हाथ दिए तब, 
लछिमन के तुम प्रान उबारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

रावन जुध अजान कियो तब, 
नाग कि फांस सबै सिर डारो॥

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, 
मोह भयो यह संकट भारो॥

आनि खगेस तबै हनुमान जु, 
बंधन काटि सुत्रास निवारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

बंधू समेत जबै अहिरावन, 
लै रघुनाथ पताल सिधारो॥

देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, 
देउ सबै मिलि मंत्र विचारो॥

जाये सहाए भयो तब ही, 
अहिरावन सैन्य समेत संहारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

काज किए बड़ देवन के तुम, 
बीर महाप्रभु देखि बिचारो॥

कौन सो संकट मोर गरीब को, 
जो तुमसे नहिं जात है टारो॥

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, 
जो कछु संकट होए हमारो॥

को नहीं जानत है जग में कपि, 
संकटमोचन नाम तिहारो॥

॥ दोहा॥

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर॥
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥
जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान॥

भक्ति का अनुभव केवल शब्दों में नहीं, भावनाओं में भी होता है। Sankat Mochan Image के दर्शन करने से मन को स्थिरता और विश्वास मिलता है। भक्त अक्सर अपने घर या पूजा स्थल पर हनुमान जी की ऐसी छवि स्थापित करते हैं जो उन्हें दिव्यता का अनुभव कराती है।

संकट मोचन लिरिक्स न केवल भक्ति का प्रतीक हैं, बल्कि यह जीवन में साहस, शांति और आत्मविश्वास का आधार भी हैं। इसका नियमित पाठ भक्त को सभी प्रकार के संकटों से मुक्त करता है। यदि आप हनुमान भक्ति को और गहरा करना चाहते हैं, तो Karya Siddhi Hanuman Mantra और Maruti Stotra जैसे स्तोत्रों को भी अपनी साधना में शामिल करें।

FAQ

क्या इसे महिलाएँ भी पढ़ सकती हैं?

हाँ, यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए समान रूप से फलदायक है।

क्या इस स्तोत्र को सुनना भी लाभदायक है?

क्या इसे रोज़ पढ़ा जा सकता है?

Sankat Mochan का पाठ किस भाषा में करें?

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